भारतीय शेयर बाजार में तेजी के बीच विदेशी निवेशक लगातार खरीदारी कर रहे हैं. ताजा डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, बीते छह कारोबारी सत्रों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने करीब 31,000 करोड़ रुपये का निवेश शेयर बाजार में किया है.
एफपीआई के बड़ी मात्रा में निवेश करने की वजह शेयर बाजार का आकर्षक वैल्यूएशन, डॉलर के मुकाबले रुपये का मजबूत होना और अर्थव्यवस्था में तेजी आना है. एफपीआई की वापसी से भारतीय शेयर बाजार में भी बड़ी रिकवरी देखने को मिली है.
समीक्षा अवधि के दौरान, निफ्टी में करीब 6 प्रतिशत की रिकवरी देखने को मिली है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. एफपीआई का रुख बिकवाली से बदलकर खरीदारी होने के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं, जिसमें शेयर बाजार का अपने सितंबर 2024 के पीक से 16 प्रतिशत नीचे आना, रुपये का मजबूत होना और महंगाई में कमी आना, आईआईपी और जीडीपी ग्रोथ का मजबूत होना शामिल हैं.
डिपॉजिटरी के डेटा के मुताबिक, मार्च में एफपीआई की खरीदारी बढ़ने के कारण कुल आउटफ्लो कम होकर 3,973 करोड़ रुपये हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एफपीआई निवेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 2 अप्रैल को घोषित किए जाने वाले पारस्परिक टैरिफ के परिणाम पर निर्भर करेगा.
विशेषज्ञों ने आगे कहा कि अगर टैरिफ अधिक नहीं होते हैं तो यह रैली जारी रह सकती है. बीडीओ इंडिया के मनोज पुरोहित ने कहा, "इस सप्ताह स्थिति बदल गई है, एफपीआई इनफ्लो हरे निशान में शुरू हुआ है, जिससे भारतीय बाजार में रौनक लौट आई है, हालांकि यह वित्तीय वर्ष का अंतिम सप्ताह है, जिसमें आमतौर पर भारी मुनाफावसूली होती है."
बीते हफ्ते भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन शानदार रहा. निफ्टी और सेंसेक्स करीब 0.70 प्रतिशत बढ़कर 23,519.35 और 77,414.92 पर बंद हुआ. इस तेजी का नेतृत्व बैंकिंग शेयरों ने किया. बैंक निफ्टी करीब 2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 51,564.81 पर बंद हुआ. सेक्टोरल आधार पर निफ्टी पीएसई और एफएमसीजी इंडेक्स टॉप गेनर्स थे, जबकि मीडिया और फार्मा इंडेक्स टॉप लूजर्स थे.
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